नारस। संकटमोचन संगीत समारोह का मंगलवार को विधिवत शुभारम्भ हुआ। 6 दिवसीय इस संगीत समारोह के पहले दिन ही काशी के संगीत प्रेमी अपनी जगह तलाशते दिखे और देर रात तक अपलक संगीत के पुरोधाओं की स्वर लहरियों और भाव-भंगिमा पर तालियां बजाते रहे। हनुमत दरबार की पहली निशा परवान चढ़ी पद्मश्री डॉ सोनल मान सिंह के ओड़िसी नृत्य से।

अमेरिका की डॉ येल्ला की प्रस्तुति से हुआ शुभारम्भ
हनुमत दरबार में वैसे तो साल भर लोग अपनी मनोकामना के लिए मत्था टेकते हैं। तो साल में 6 दिन ऐसे भी होते हैं जब हनुमत दरबार में भगवान हनुमान के संगीत से पाँव पखारे जाते हैं। हनुमत दरबार में आयोजित होने वाले संगीत समारोह की मंगलवार से शुरुवात हो गयी। पहली निशा में पहली प्रस्तुति दी अमेरिका से आयी कुचिपुड़ी नृत्याँगना डॉ येल्ला विजय दुर्गा ने, अपने नृत्य से इन्होने श्रोताओं को बांधे रखा। उन्होंने अरण्य काण्ड के हनुमान और भगवान् राम के मिलान को प्रस्तुत किया। इस दृश्य को संगीत के माध्यम से देख कई श्रोताओं की पलकें नम हो गयी। डॉ येल्ला ने दशावतार की झांकी से अपनी प्रस्तुति को विराम दिया।

विज्ञापन

पद्मश्री सोनल मान सिंह ने बांधा समा
संगीत समारोह की दूसरी प्रस्तुति के लिए जैसे ही मंच पर पद्मश्री डॉ सोनल मान सिंह पहुंची हनुमत दरबार में हर हर महादेव का जयघोष गूँज उठा। डॉ सोनल मान सिंह ने ओडिसी नृत्य से समा बाँध दिया। महिषासुर मर्दानी पर किये गए ओडिसी नृत्य को देखकर पूरा हनुमत दरबार तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा।

पारिवारिक ईर्ष्या का दर्शाया रूप
इसके बाद उन्होंने पारिवारिक ईर्ष्या को भगवान् शंकर के परिवार से नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया, जिसमे उन्होंने दर्शाया कि कैसे भगवान् के गले में लिपटा सर्प भगवान गणेश की सवारी मूषक राज को खाना चाह रहा है और भगवान कार्तिकेय की सवारी मोर कैसे सर्प को खाना चाह रही है। उसी प्रकार भगवान की जटाओं से निकले मां गंगा से कैसे माता पार्वती को ईर्ष्या हो रही है। अंत में उन्होंने हनुमाना चालीसा पर नृत्य किया।

सितार वादक मंजू को देर तक सुनते रहे संगीत प्रेमी
इसके बाद अहमदाबाद की कलाकार विदूषी मंजू मेहता ने अपनी प्रस्तुति सितार पर राग सरस्वती की झंकार से शुरू की, उस दौरान ऐसा लगा मानों हनुमत दरबार में मां सरस्वती का वास हो गया हो। इसके बाद मंजू मेहता ने तबले पर सांगत कर रहे पंडित किशन महराज के पुत्र पंडित पूरन महाराज के साथ सितार की संगता से श्रोताओं को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान उन्होंने कई सुर निकालकर संगत की। मंच पर प्रस्तुति देने के बाद मंजू ने श्रोताओं का अभिवादन किया साथ ही कहा कि मेरे लिए सौभाग्य की बता है की हनुमत दरबार में स्वरों से हाज़री लगा पायी।

विज्ञापन
Loading...