नारस। इलाहाबाद के बाहुबली राजनेता अतीक अहमद के वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर है। सूत्रों की मानें तो नैनी सेंट्रल जेल में बंद अतीक ने शनिवार को स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट में एक एप्लीकेशन देकर अपने आपको रिहा करने की अपील की है।

सोमवार को होगी बेल पर सुनवाई
इस एप्लीकेशन के मुताबिक उसे वाराणसी से नामांकन और प्रचार करना है, इसलिए उसे रिहा किया जाए। अतीक ने यह भी दावा किया है कि वाराणसी निर्वाचन कार्यालय से उसके लिए नामांकन पत्र खरीदा जा चुका है। अतीक की बेल एप्लीकेशन शनिवार को कोर्ट के सामने रखी गई है, जिसकी सुनवाई सोमवार को स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट में होनी है।

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गुजरात जेल ट्रांसफर का आर्डर
बता दें कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अतीक अहमद को उत्तर प्रदेश की नैनी जेल से गुजरात जेल ट्रांसफर करने का आदेश दिया है। इससे पहले अतीक देवरिया जेल में बंद था, जहां उसने एक व्यापारी को बुलाकर जेल के अंदर प्रताड़ित करने का आरोप लगा साथ ही उक्त व्यापारी के 5 बिजनेस अपने नाम लिखा लेने का आरोप भी अतीक पर लगा। इसके बाद उसे बरेली जेल भेजा गया था, जहां से उसे बाद में नैनी जेल शिफ्ट कर दिया गया।

17 साल की उम्र में किया पहला जुर्म
1979 में महज 17 साल की उम्र में इलाहाबाद में एक हत्‍या के जरिए जरायम की दुनिया मे कदम रखने वाले अतीक ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसने लगभग तीन दशकों तक इलाहाबाद, फूलपुर और चित्रकूट में अपना एक सुसंगठित गिरोह चलाया।

अतीक बंधुओं पर डेढ सौ से ज्यादा मुकदमे
प्रयागराज के एसपी (क्राइम) मनोज अवस्‍थी के मुताबिक, ‘इलाहाबाद के खुल्‍दाबाद पुलिस स्‍टेशन में अतीक हिस्‍ट्री शीटर नंबर 39A हैं।’ पुलिस के डोजियर के मुताबिक अतीक के गैंग को ‘अंतरराज्‍य गिरोह 227’ के रूप में लिस्‍टेड किया गया है। उसके इस गिरोह में 121 सदस्‍य शामिल हैं। इस गैंग में अतीक का छोटा भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ भी शामिल है। इन दोनों माफिया भाइयों पर लगभग डेढ़ सौ मुकदमे दर्ज हैं। अतीक अहमद ने डॉन से नेता का चोला 1989 में पहना था। वर्ष 2004 तक वह छह बार चुनाव जीत चुका था। इसमें पांच बार वह इलाहाबाद पश्चिम सीट से विधायक और एक बार फूलपुर लोकसभा सीट से सांसद रहा।

अखिलेश यादव को भी पसंद नहीं अतीक
निर्दलीय उम्‍मीदवार के रूप में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले अतीक ने बाद में समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर ली थी। इसके बाद उसने अपना दल का रुख किया। साल 2004 के चुनाव में अतीक ने एसपी के टिकट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन वर्ष 2014 के चुनाव में बुरी तरह से हार गया। साल 2018 के फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में अतीक अहमद ने किस्मत आजमाई, लेकिन एक बार फिर उसे शिकस्‍त मिली। समाजवादी पार्टी अध्‍यक्ष अखिलेश यादव खुलेआम मंच से कह चुके हैं कि वह अतीक को नापसंद करते हैं। एक बार उन्होंने अतीक अहमद को मंच से धक्का देकर नीचे उतार दिया था।

बसपा विधायक राजू पाल की हत्या में नाम
अतीक का नाम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में तब आया जब उसने वर्ष 2005 में बीएसपी एमएलए राजू पाल की हत्‍या कर दी थी। राजू पाल ने अतीक के भाई अशरफ के खिलाफ चुनाव लड़कर उसे हरा दिया था। कहा जाता है कि दोनों भाई इसी के चलते राजू पाल से अदावत रखने लगे। इसकी परिणीति राजू पाल की हत्या के रूप में हुई।

जेल से चलाता है साम्राज्य
कहां जाता है कि अतीक को कई जेलों में शिफ्ट किए जाने के बाद भी उसने अपने गैंग पर पूरा कंट्रोल रखा है और उसे चलाता रहा है। अमूमन यह माना जाता है कि अपराधी राजनीति में आने के बाद ‘माननीय’ बनने के लिए अपनी छवि सुधारते हैं, लेकिन अतीक अहमद इस मामले में भी अपवाद माना जाता है। जेल में बंद रहने के बावजूद उसकी माफियागिरी अभी भी बेरोकटोक चल रही है।

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