प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में लोकसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह से हंगामाखेज हो चुकी है। 102 प्रत्याशियों द्वारा वाराणसी से नामांकन दाखिल करने के बाद अब जिला निर्वाचन कार्यालय ने स्क्रीनिंग करते हुए कुल 30 उम्मीदवारों को ही चुनावी रणभूमि में उतरने के लिये हरी झंडी दिखायी है। इसके बाद वाराणसी जिला निर्वाचन कार्यालय के बाहर जैसे भूचाल आ गया हो। जिन प्रत्याशियों के नामांकन पत्र कैंसिल हुए हैं उनमें जबरदस्त रोष देखा जा रहा है।

इधर…
सपा-बसपा महागठबंधन की ओर से पहले घोषित की गयी अपनी आधिकारिक उम्मीदवार शालिनी यादव को साइड लाइन करते हुए आखिरी वक्त में बर्खास्त बीएसएफ जवान तेज बहादुर पर दांव खेला गया, मगर शायद होनी को कुछ और ही मंजूर था। इसे बद्किस्मती ही कहेंगे कि तेज बहादुर के नामांकन पर भी अब चुनाव आयोग की तलवार लटकने लगी है। किसी भी समय तेज बहादुर यादव की उम्मीदवारी को रद करने का आधिकारिक फैसला सुनाया जा सकता है। वहीं शालिनी यादव, जो अबतक महागठबंधन की ओर से डमी उम्मीदवार कही जा रहीं थीं, उन्हें चुनाव आयोग ने समाजवादी पार्टी सिंबल पर प्रमुख उम्मीदवार करार दे दिया है।

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अब आते हैं मुद्दे की बात पर
बनारस की चुनावी फिजा में जब इतना कुछ उठा-पटक हो रहा है तो ऐसे में एक बवंडर वाली खबर और तैरने लगी है। चर्चाओं का बाजार गर्म है कि जिस शालिनी यादव को सपा ने आखिरी वक्त में गच्चा देते हुए तेज बहादुर यादव को अपना प्रत्याशी घोषित किया था, वही शालिनी यादव अब सपा को भी गच्चा दे सकती हैं। कहा जा रहा है कि नामांकन वाले दिन गाजे-बाजे के साथ जिला निर्वाचन कार्यालय पहुंची शालिनी यादव को जब ये पता लगा था कि पार्टी की ओर से उनके खिलाफ खेल हुआ है और तेज बहादुर यादव को प्रमुख प्रत्याशी बनाते हुए उन्हें डमी प्रत्याशी घोषित किया गया है, तो शालिनी का गुस्सा सातवें आसमान पर था। हालांकि, पार्टीगत मजबूरियों के चलते उन्होंने वही रटी रटायी लाइन मीडिया के सामने दोहरायी कि ”जो पार्टी अध्यक्ष का आदेश होगा, वहीं करूंगी।”

लखनऊ के नेताओं की अटकी हैं सांस
अब बनारस में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि गुरुवार यानी दो मई को नाम वापसी की आखिरी तारीख है, ऐसे में तेज बहादुर का नामांकन रद होने के बाद सपा-बसपा गठबंधन की आखिरी उम्मीद शालिनी यादव ने भी अपने साथ हुए धोखे और उस धोखे की वजह से हुई बेइज्जती का बदला लेने की ठान ली तो मामला फंस सकता है, क्योंकि अगर शालिनी यादव ने नाम वापसी के लिये आवेदन कर दिया तो बनारस में सपा-बसपा गठबंधन को जबरदस्त झटका लगना तय है। वर्तमान परिस्थिति में लखनऊ में बैठकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को टक्कर देने की रणनीति बनाने में जुटे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की सांस अटकी हुई है।

फिलहाल…
ये बस वो चर्चाएं भर हैं जो बनारस की चुनावी फिजाओं तथा चाय-चुक्कड की दुकानों और चौराहों पर सजने वाली अडियों पर बडी तेजी के साथ वायरल हो रही हैं। हालांकि, शालिनी यादव का आज भी यही दावा है कि वो समाजवादी पार्टी की आधिकारिक उम्मीदवार हैं और वाराणसी की जनता के सपोर्ट से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भारी मत से हराकर सांसदी का चुनाव जीतेंगी।

खैर…
अगले दो दिन वाराणसी की चुनावी माहौल के लिये बेहद हंगामाखेज होने वाले हैं। फिलहाल तो आप भी बनारस में सांसदी के संग्राम से पहले हो रही नामांकन की नूराकुश्ती का आनंद उठाइए।

तबतक के लिये…. हमेशा के लिये….लोकतंत्र जिन्दाबाद।

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