बनारस को आवारा मवेशियों से निजात दिलाने के लिये युद्धस्तर पर तैयार हो रही हैं गो-शालाएं

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नारस। मुख्य विकास अधिकारी ने जिले के पिण्डरा तहसील के खरावन व मधुमखिया गांवों में बन रहे गोवंश आश्रम स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि यहाँ रखे जाने वाले निराश्रित पशुओं का नियमित स्वास्थ्य परिक्षण एवं समस्य समय पर टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही उनके भूसे और चारे का प्रयाप्त प्रबंध हो।

मुख्य विकास अधिकारी गौरांग राठी ने बताया कि वाराणसी में गोवंश आश्रय स्थलों का संचालन होना शुरू हो गया है। नगर निगम द्वारा कान्हा उपवन, छितौनी कोट में एवं ग्रामीण क्षेत्र के ग्राम खजुरी, पिण्डरा में अस्थाई गौशाला में सबसे पहले चालू किए गये। अब आगामी 15 मई तक नगर निगम के शहंशाहपुर व ग्रामीण क्षेत्रों के खरावन(बड़ागांव), भिटकुरी(सेवापुरी), सजोई(आराजीलाइन) व कोटवा (काशीविद्यापीठ) में गोवंश आश्रम स्थलों का संचालन प्रारंभ कराने में जनपद प्रशासन युद्धस्तर पर लगा हुआ है। उन्होंने बताया कि अभी इधर-उधर भटक रहे निराश्रित पशुओं को अस्थाई रूप से रखने के लिये भोजूबीर व नक्खी घाट में नगर निगम द्वारा दो कांजी हाउस चलाये जा रहे हैं।

सीडीओ ने बताया कि आगामी एक माह में जनपद के अधिकांश हिस्सों में गोवंश आश्रय स्थल चालू करने की रणनीति पर कार्य हो रहा है। निर्वाचन कार्य में लगे होने के कारण अधिकारी-कर्मचारी व्यस्त है लेकिन ग्राम चांदपुर के कलक्टरी फार्म में तथा बड़ागांव विकास खंड के मधुमखिया में 2 बड़े गोवंश आश्रय स्थलों स्थापित करने की कार्य योजना पर बराबर काम चल रहा है।

उन्होंने बताया कि इन गौशालाओं में भूसा-चारा के सुरक्षित भंडार हेतु बांस के बने किफायती ऑर्गेनिक गोदाम होंगे। सुरक्षित जल निकासी व जल संरक्षण की भी व्यवस्था होगी। स्वच्छ जलापूर्ति, चारागाह विकास व प्रकाश की उचित व्यवस्था भी होगी। इसके अलावा पशुओं को स्वच्छ, हवादार वातावरण में रखा जाएगा व उनके नियमित टीकाकरण, उचित उपचार हेतु पशु चिकित्सा विभाग निरंतर सक्रिय रहेगा।

बता दें कि गोवंश आश्रम स्थलों के संचालन व प्रबंधन हेतु महिला स्वयं सहायता समूहों का भी योगदान दिया जाएगा। धीरे-धीरे संपूर्ण जनपद में गोवंश आश्रम स्थलों का एक व्यापक नेटवर्क दिखने लगेगा। इसी क्रम में पिण्डरा तहसील के ग्राम मधुमखिया में शासन से मुख्य पशु चिकित्सा को विभागीय बजट से 1.20 करोड़ रुपए के निर्माण हेतु आवंटित किए गए हैं जिसके सापेक्ष 0.95 क्षेत्रफल में गोवंश आश्रय स्थल का निर्माण प्रगति पर है।