नारस। काशी के पुराने अस्सी घाट पर क्लाइमेट एजेंडा द्वारा एक हस्ताक्षर अभियान का आयोजन किया गया. पर्यावरण संरक्षण की मांग पर वैश्विक स्तर पर चल रहे अभियान फ्राइडेज फॉर फ्यूचर की कड़ी में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आज ही के दिन पूरी दुनिया में 100 से अधिक शहरों में यह एक साथ आयोजित हुआ।

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कार्यक्रम के सन्दर्भ में बताते हुए क्लाइमेट एजेंडा की निदेशक एकता शेखर ने बताया 3 जनवरी 2003 को स्वीडेन में जन्मी ग्रेटा थंबर्ग ने अपनी छोटी सी उम्र में पर्यावरण संरक्षण के लिए दुनिया भर में जारी संघर्ष को एक नया आयाम दिया है।

तमाम बातों के साथ साथ उसने यह दिखाया है कि पर्यावरण, धरती बचाने की लड़ाई केवल वयस्कों, विशेषज्ञों
एवं प्रोफेशनलों की लड़ाई मात्र नहीं है।

हर वर्ग, उम्र और समझ के लोगों को एक साथ आना होगा।  उसने यह भी समझाने की कोशिश करी है कि बच्चों को पढ़ने लिखने अच्छे स्कूलों में भेज पाने लायक होकर माँ बाप के मन में जो संतोष का भाव जगता है, वो अधूरा है।  नयी पीढी को अगर वास्तव में हमसे कुछ चाहिए ही तो वो हमसे इस बात की गारंटी लेना ही पसंद करेगी कि हम पृथ्वी उनके लिए वैसी ही छोड़ जायेंगे जैसी हमें अपने पूर्वजों से मिली थी.”

अभियान की प्रमुख सदस्य सानिया अनवर ने बताया “ग्रेटा fridays for future” नामक अभियान चला रही हैं, और दुनिया भर से सभी को इसमे जुड़ने का आह्वान कर रही हैं। शुक्रवार को वे अपने स्कूल नहीं जातीं, और स्वीडेन की संसद के बाहर बैठ कर जन प्रतिनिधियों के ऊपर दबाव बना रही हैं ताकि पर्यावरण के हित में फैसले लिए जा सकें. ग्रेटा इसे स्कूल स्ट्राइक फॉर क्लाइमेट का नाम देती हैं।

उन्होंने बताया “आज उन्होंने बच्चों के साथ साथ वयस्कों को भी इस मुहीम में शामिल होने का आह्वान किया है. इसी आह्वान को अपना समर्थन देते हुए बनारस में कुछ साथी, अस्सी घाट पर आज शुक्रवार की शाम 5 बजे जुटें हैं।  एक घंटे हस्ताक्षर अभियान के साथ इस मुहीम को आगे बढाने की संभावित रणनीति पर चर्चा इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य है।

इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से मुकेश उपाध्याय, दिवाकर सिंह, आकांक्षा, साश्वत, रितेश,  ब्रिजेश, आशुतोष, रवि मौर्या, सुनील सिंह, आशीष, प्रतिमा, सुबोध, पारो, रेनू, माधवी, आकाश, रवि शेखर समेत सैकड़ों लोगों ने हस्ताक्षर के माध्यम से शिरकत की।

 

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