नारस। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं। आज इस पर्व के अवसर पर वाराणसी के गंगा घाटो, खासकर दशाश्मेध पर स्नानार्थियों की भीड़ देखी गई। भोर से ही गंगा तट पर मौजूद आस्थावानों ने सूरज की पहली किरण के साथ ही गंगा में डुबकी लगना शुरू कर दी।

इस सम्बन्ध में बात करते हुए तीर्थ पुरोहित रामकृष्ण पांडेय ने बताया कि आज ही के दिन विवाहित स्त्रियों गंगा स्नान के बाद पीपल के वृक्ष की दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चन्दन इत्यादि से पूजा और वृक्ष के चारों ओर 108 बार धागा लपेट कर परिक्रमा करती है। धान, पान और खड़ी हल्दी को मिला कर उसे विधान पूर्वक तुलसी के पेड़ को चढ़ाया जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का भी विशेष महत्व समझा जाता है। कहा जाता है कि महाभारत में भीष्म ने युधिष्ठिर को इस दिन का महत्व समझाते हुए कहा था कि, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य समृद्ध, स्वस्थ्य और सभी दुखों से मुक्त होगा। ऐसा भी माना जाता है कि स्नान करने से पितरों कि आत्माओं को शांति मिलती है।

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