नारस। ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी को भागीरथी के अथक प्रयासों के बाद संसार के लोगों के पापों का नाश करने के लिए सदानीरा मां गंगा पृथ्वी पर आयी थी। इस दिन को काशी में गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी गंगोत्री सेवा समिति इस पावन पर्व  पर भव्य आयोजन करेगी। सुबह जहाँ मंगलबेला में मां गंगा का 51 लीटर दूध से अभिषेक किया जाएगा वहीं शाम में 11 वैदिक ब्रह्मण गंगा पूजन और आरती करेंगे।

इस सम्बन्ध में गंगोत्री सेवा समिति के सचिव पंडित दिनेश शंकर दूबे ने बताया कि ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है। स्कंदपुराण के अनुसार, गंगा दशहरे के दिन व्यक्ति को किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। इस दिन ध्यान व दान करना चाहिए। इससे सभी पापों से मुक्ति मिलती है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष गंगोत्री सेवा समिति इस दिन को भव्य बनाने की तैयारी में लगी हुई है।

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सचिव पंडित दिनेश शंकर दूबे ने बताया कि इस दिन हमारी तरफ से 51 लीटर दूध से माँ गंगा का दुग्धाभिषेक होगा। शाम में 11 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा महाआरती होगी और उनके पीछे रिद्धि-सिद्धि के रूप में 21 कन्याएं चवंर हिलायेंगी। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे

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