नारस। बुधवार को काली महल स्थित शिया मस्जिद से जन्नत उल बक़ी की याद में अन्जुमन ए हैदरी के तत्वधान में जुलूस निकाला गया। ये जुलूस कालीमहल से निकल कर नई सड़क, दालमंडी, चौक, मैदागिन होता हुआ शिया जामा मस्जिद दारानगर में पहुँच कर जलसे में तब्दील हुआ । इस मौके पर मौलाना आमीन हुसैनी साहब ने तक़रीर करके जन्नत उल बक़ी में कल और आज की स्थिति से अवगत कराया और बताया कि किस तरह से ज़ुल्म करके रसूल की एकलौती बेटी जनाबे फ़ातिमा ज़हरा और शिया मुसलमानों के कई इमामों के रौज़े मिस्मार कर के उनकी क़ब्रों को साए से महरूम कर दिया गया, जिसे सुन कर लोगों की आंखें नम हो गई।

 

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बता दें कि उर्दू माह शव्वाल की 8 तारीख को सन 1925-26 में सऊदी अरब में स्थित मदीना मुनव्वर में हज़रत मोहम्मद की एकलौती बेटी जनाबे फातिमा ज़हरा और उनके खानदान की क़ब्रो पर बने हुए रौज़ो को सऊदी हुकूमत ने गिरा दिया था। तब से इस्लामिक तारीख़ 8 शव्वाल को शिया समुदाय पूरी दुनिया में एहतेजाज करके सऊदी हुकूमत की इस नापाक हरकतों की मज़म्मत करता है और अपनी हुकूमत से इल्तेज़ा करता है कि सऊदी हुकूमत पर दबाव बनाए ताकि दोबारा से इन रौज़ों की तामीर हो सके।

जुलूस में मुख्य रूप से मौलाना अमीन हुसैनी साहब, मुर्तुजा हुसैन शम्सी, डॉक्टर अज़ीज़ हैदर, मुनाजिर हुसैन ‘मंजू’, फरमान हैदर, अंसार बनारसी, वफ़ा बुतूराबी, शराफत अली, लियाक़त अली, शब्बू इलाहाबादी, अनवर हुसैन, डॉक्टर मासूम रज़ा, डॉक्टर हसन रज़ा, काबे अली, ज़ुल्फ़िक़ार ज़ैदी, मोहम्मद अली, सादिक़ इमाम, साग़र मेहदी, जावेद हुसैन, हाशिम आदि लोग जुलूस में उपस्थित थे।

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