रुक गया विश्वनाथ कॉरिडोर का ये कार्य, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

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नारस। प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट के एक आर्डर ने रोक लगा दी है। तेज़ गति से रिमित हो रहे इस परियोजना के एक हिस्से में 1872 में बनी कारमाइकल लाइब्रेरी में मौजूद दुकानों के मालिकों की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए इस लाइब्रेरी का ध्वस्तीकरण अग्रिम आदेशों तक रोक दिया है

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट व प्रदेश सरकार की प्रस्तावित कॉरिडोर व विस्तारिकरण योजना पर एक बार पुन: रोड़ा अटक गया है। यह रोड़ा छत्ताद्वार पर मौजूद प्राचीन कारमाइकल लाईब्रेरी भवन सी.के. 36 /8 के दुकानों के धवस्तीकरण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट से याचिका ख़ारिज होने के बाद भवन के दुकानदार धीरज गुप्ता व अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाख़िल की थी, जिसपर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ध्वस्तीकरण का कार्य रोक दिया है।

बता दें कि 1872 में बनी काशी के प्राचीन लाइब्रेरीयों में से एक कारमाइकल भवन को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ट्रस्ट ने ख़रीद लिया था। इसमें सड़क की तरफ़ा कई दुकानें भी है। हाईकोर्ट से याचिका ख़ारिज होने के बाद ट्रस्ट के उक्त भवन को सरकार द्वारा प्रस्तावित योजना में शामिल कर ध्वस्तीकरण किया जा रहा था। इस दौरान दुकानदारों ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी।

सुप्रीमकोर्ट में न्यायमूर्ति इन्दिराबनर्जी व न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की बेंच ने भवन के दुकानदार यंत्रलेश्वर गुप्ता, राजेन्द्र माहेश्वरी सहित पॉच अन्य की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुये अग्रिम आदेशों तक ध्वस्तीकरण पर रोक लगा दिया। याचिका में भवन के दुकानदारों ने माननीय हाईकोर्ट के आदेशों को असंवैधानिक बताया था।