अपनी पीठ थपथपाने के लिए वाराणसी पुलिस ने किया कारनामा, नाबालिग को भेजा जेल

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साथ में संवाददाता ध्यान चंद शर्मा 

नारस। सूबे में कानून व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करने के लिए सीएम योगी ने खुद अधिकारियों की मीटिंग ली और उन्हें आवश्यक दिशा निर्देश दिए, पर बार बार सूबे की कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान लगता जा रहा है। ताज़ा मामला प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के सारनाथ थाने का है। इस थानाक्षेत्र के तिलमापुर गांव में बाइक सवार दो युवक तीन लड़कियों को बाईक पर लेकर सोमवार को फरार हो गए थे। इस सम्बन्ध में सारनाथ पुलिस ने एक नाबालिग को पकड़ा और उसे रात भर अन्य अपराधियों के साथ लॉकअप में रखा।

यही नहीं उसकी मेडिकल रिपोर्ट में उसके नाबालिग होने के बावजूद उसे कोर्ट में पेश करते हुए जेल भेज दिया गया जबकि उसे बाल सुधार गृह भेजना चाहिए था। साथ ही बाल संरक्षण कानून के खिलाफ जाकर नाबालिग का नाम भी उजागर किया।

कैसे हुआ खुलासा
थानाध्यक्ष सारनाथ ने तीन लड़कियों के गायब होने के बाद मंत्री के दबाव में मुकदमा दर्ज किया और कुछ ही घंटों में लड़कियों को रिकवर करते हुए एक नाबालिग को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार नाबालिग मुख्य आरोपी का दोस्त बताया जा रहा है। Live VNS के संवाददाता जब इस सूचना पर थाने पहुंचे तो एसओ साहब ने मना कर दिया। इस सम्बन्ध में सीओ कैंट अनिल कुमार से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि लड़का प्रथम दृष्टया नाबालिग है। फिलहाल मेडिकल रिपोर्ट से यह बात क्लियर होगी।

मेडिकल रिपोर्ट में उम्र 16 साल
भारतीय संविधान के अनुसार कोई भी लड़का 18 साल की उम्र में बालिग़ होता है। पकडे गए युवक की मेडिकल रिपोर्ट में उसकी उम्र 16 साल डाक्टरों ने अंकित की है। इसके बाद भी संविधान के नियमों को ताख पर रखते हुए सारनाथ पुलिस ने उक्त नाबालिग को बाल सुधार गृह न भेजते हुए उसे जिला जेल भेज दिया।

खुफिया कैमरे में दर्ज हुई बात
इस सबंध में जब हमारे संवाददाता सारनाथ सामुदायिक स्वास्थ केंद्र पहुंचे जहां बालक की मेडिकल रिपोर्ट बनी थी तो वहां पहले तो डाक्टर ने रजिस्टर में दर्ज उम्र 16 साल दिखाई लेकिन जब फोटो और बाईट की बात आयी तो उन्होंने साफ़ इंकार किया और कहा कि उम्र 16 साल है बालक की लेकिन आप जाइये थाने से मेडिकल रिपोर्ट ले लीजिये ये हम नहीं देंगे। यह पूरी बातचीत हमारे संवाददाता ने खुफिया कैमरे में रिकार्ड कर ली।

आखिर जेल ने कैसे ली इंट्री
सवाल यहां ये उठता है कि जेल अधिकारियों ने बिना मेडिकल रिपोर्ट देखे कैसे उस नाबालिग को जेल में इंट्री दी और उसे बैरक और कैदी नंबर एलाट किया जबकि वह मेडिकल में नाबालिग था।

आधार ने लगाईं अंतिम मुहर
टीम Live VNS पकडे गए नाबालिग के घर चिरईगांव स्थित गौरा कलां पहुंची। तो यहाँ परिजनों उक्त बालक का आधार कार्ड दिखाया जिसमे उसकी जन्मतिथि 1 मई 2004 अंकित है। इसके बावजूद नाबालिग को जेल भेजा गया जो की पुलिसिया कार्रवाई पर सवालिया निशान लगा रही है।

लॉकअप तो क्या थाने में नहीं रख सकते
इस सम्बन्ध में हमने जब जिला प्रोबेशन ऑफिसर प्रवीण त्रिपाठी से बात करनी चाही तो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। उनकी अनुपस्थिति में बाल संरक्षण अधिकारी निरूपमा सिंह से हमने बात की, उन्होंने बताया कि यदि कोई नाबालिग पुलिस के संज्ञान में आता है किसी अपराध में और वह पकड़ा जाता है तो उसे पुलिस थाने में भी नहीं रख सकती हवालात तो दूर की बात है। यदि कहीं ऐसा हो रहा है तो किशोर न्याय अधिनियम के तहत किशोर जस्टिस बोर्ड उनके विरुद्ध कार्रवाई कर सकती है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
हमने इस सम्बन्ध में अपने विधि सलाहकार वाराणसी बार के पूर्व अध्यक्ष एडवोकट विवेक शंकर त्रिपाठी से बात की, उन्होंने बताया कि डिटरमिनेशन ऑफ़ एज के लिए जन्म प्रमाणपत्र दाखिल कर उसे किशोर प्रूफ कर सकते हैं या हाईस्कूल का मार्कशीट और सर्टिफिकेट और यदि यह नहीं है तो मेडिकल टेस्ट है के द्वारा क्लियर हो जाएगा। यदि पुलिस ने मेडिकल में आने के बाद भी नाबालिग को लॉकअप में रखा है तो थानाध्यक्ष के लगायत सभी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।

देखना यह होगा कि क्या इस मामले के संज्ञान में आने के बाद आला अधिकारी इस सम्बन्ध में कोई कार्रवाई करते हैं या नाबालिग को जेल में ही रहना पड़ता है। फिलहाल बालक अभी भी चौकाघाट जिला जेल में बंद है।