नारस। कभी फिल्‍म स्‍टार नाना पाटेकर के घर रसोइया रहे वाराणसी के संतोष मूरत सिंह की सरकारी मौत 2003 में ही हो चुकी थी। इसे हमारे सिस्‍टम की खामी कहें या जिम्‍मेदार अफसरों की लापरवाही, पिछले 16 साल से संतोष ‘भूत’ बनकर कभी दिल्‍ली के जंतर-मंतर पर न्‍याय की गुहार लगा रहे थे तो कभी मुख्यालय वाराणसी पर, लेकिन बुधवार को कलेक्ट्रेट जिला राइफल क्लब में जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने संतोष मूरत सिंह उर्फ़ मै ज़िंदा हूं की बात संजीदगी से सुनी और मौके का स्थलीय निरिक्षण कर उनकी ज़मीनों को मुक्त कराया। जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने इस दौरान संतोष मूरत सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों के मद्देनजर गांव में मौजूद ग्रामीणों से जमीन से संबंधित जानकारी भी ली।

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थाना चौबेपुर के ग्राम-छितौनी निवासी संतोष मूरत सिंह (मैं जिंदा हूं) द्वारा उनके जमीन पर स्थानीय नारायण सिंह, विनोद सिंह, सर्वजीत यादव एवं अरविंद द्वारा साजिशन अवैध कब्जा कर लिए जाने की किये गए शिकायत को जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने गम्भीरता से लिया। डीएम नगर मजिस्ट्रेट, उपजिलाधिकारी सदर, कानूनगो, थाना प्रभारी चौबेपुर एवं क्षेत्रीय लेखपाल को लेकर मौके पर पहुंचे और राम मूरत सिंह की जमीन की नापी अपने मौजूदगी में कराई।

जिलाधिकारी ने वहां मौजूद राजस्व लेखपाल, कानूनगो एवं उपजिलाधिकारी को निर्देशित किया कि खतौनी के आधार पर संतोष मूरत सिंह का जितना हिस्सा बनता है उतना नापी करते हुए निशान लगा दिया जाए और भविष्य में यदि किसी के द्वारा जमीन पर अवैध तरीके से पुनः कब्जा किये जाने की सूचना मिलती है, तो संबंधित व्यक्ति के ऊपर भू माफिया के तहत कार्रवाई की जाय। साथ ही उन्होंने थानाध्यक्ष चौबेपुर को निर्देशित किया कि जिन लोगों ने भी गलत तरीके से जमीन पर कब्जा कर रखा है या दूसरे की जमीन पर कब्जा किया है उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज करे और भविष्य में भी इन तरह इस तरह की समस्याओं में कड़ी कार्रवाई करें। ताकि कोई भी गलत कार्य न करें।

इस दौरान मौजूद संतोष मूरत सिंह ने अपनी लडाई में सहयोग देने वाले हर ख़ास और आम को शुक्रिया कहा। उन्होंने रुंधे गले से कहा कि कहते हैं की न्याय होता है बस उसमे समय लगता है और वही मेरे साथ हुआ।

संतोष मूरत सिंह अपनी लड़ाई के बारे में बताते हुए कहा कि वो साल 2000 में नाना पाटेकर के यहां उन्होंने रसोइये का काम शुरू किया था। संतोष ने बताया कि चौबेपुर में रहने वाले रिश्तेदारों ने 2003 में हुए मुंबई ट्रेन ब्लास्ट में मारे जाने की झूठी अफवाह फैला दी और तहसील व राजस्व विभाग के दस्तावेज़ों में मुझे मृत घोषित कराते हुए मेरी तेरहवी भी कर दी, जिसकी जानकारी मुझे मेरे एक मित्र ने बाद में गाँव से फोन करके दी। संतोष ने बताया कि यह पूरा घटनाक्रम मेरी 12 एकड़ ज़मीन हड़पने के लिए किया गया। इस बात की जानकारी होते ही जब मै वाराणसी पहुंचा तो मैंने चौबेपुर पुलिस से अपने रिश्तेदारों के खिलाफ शिकायत की और मेरी ज़मीन मेरे नाम करने की गुजारिश की, पर किसी भी पुलिस अधिकारी ने मेरा साथ नहीं दिया।

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