फिल्म आंच की ‘आंच’, से मुर्दा हुए संतोष मूरत सिंह को मिला इंसाफ, शासन को कहा शुक्रिया

0
112

नारस। चौबेपुर थानाक्षेत्र के छितौनी ग्राम में साल 2000 में बॉलीवुड के एक्टर नाना पाटेकर शूटिंग के लिए पहुंचे तो यहां उनकी मुलाक़ात राम मूरत सिंह के छोटे बेटे संतोष मूरत सिंह से हुई। संतोष के हाथों के बने भोजन के कायल हुए नाना उसे लेकर मुंबई चले गए, पर ये मुंबई जाना संतोष के लिए 16 साल की सज़ा बन गयी। पट्टीदारों ने संतोष को ज़मीन की लालच में साल 2003 में मुर्दा घोषित करवा दिया। तब से खुद को ज़िंदा साबित करने के लिए लड़ाई लड़ रहे संतोष को बुधवार को जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने न्याय दिलवाया। आखिर क्या है सच्चाई और संतोष की संघर्ष की कहानी जानिए इस ख़ास रिपोर्ट में।

दलित युवती से किया प्रेम विवाह
28 नवम्बर 2003 को रिलीज़ हुई बॉलीवुड की फिल्म आंच बॉक्स आफिस पर कुछ धमाल नहीं मचा पायी, पर इस फिल्म की शूटिंग के दौरान इसकी स्टारकास्ट के करीब आये एक बनारसी के जीवन में धमाल ज़रूर मच गया। चौबेपुर थानाक्षेत्र के छितौनी ग्राम संतोष मूरत सिंह को नाना पाटेकर इस फिल्म की वाराणसी की शूटिंग खत्म होने के बाद मुंबई ले गए। वहां साल 2002 में दलित मराठी युवती से प्रेम के बाद विवाह संतोष के जीवन में भूचाल ले आया।

बिरादरी से हुआ बहिष्कृत
संतोष ने Live VNS को बताया कि जब मैं अपनी पत्नी को लेकर वापस गांव पहुंचा तो ठाकुर बिरादरी का होने की वजह से मेरे ऊपर उंगलियां समाज और बिरादरी ने मेरा बहिष्कार कर दिया। इसके बाद हम वापस मुंबई लौट गए। साल 2003 में हमें पता चला कि हमारे पट्टीदार हमारी ज़मीन कब्ज़ा कर रहे हैं। वहां पहुंचा तो पता चला रेल हादसे मे मृत दिखाकर इन लोगों ने मेरी तेरहवीं कर मेरी ज़मीन अपने नाम करा ली है।

जंतर-मंतर से लेकर वाराणसी तक संघर्ष
संतोष ने बताया कि उसी दिन से मै दर दर की ठोकरें खा रहा हूँ। जंतर मंतर दिल्ली में धरना, तिहाड़ जेल में कैदी के रूप में, राष्ट्रपति का चुनाव, और कई सारी प्रक्रिया के बाद भी मुझे न्याय नहीं मिल रहा था। मैंने वापस आकर बनारस में शुरू किया क्योंकि मुझे प्रधानमंत्री से आस थी कि वो मुझे न्याय दिलवा देंगे पर ऐसा नहीं हुआ।

क्राइम ब्रांच ने शुरू की थी तफ्तीश
संतोष मूरत सिंह के मामले में पुलिस मुख्यालय लखनऊ की संतुति के बाद जनवरी 2018 में क्राइम ब्रांच ने भी इस मामले की तफ्तीश शुरू की थी लेकिंन उसका कोई रिज़ल्ट नहीं आया था।

डीएम ने दिलाया इन्साफ
बुढ़वा रको रायफल क्लब सभागार में सुबह 9 से 11 बजे तक जनता की फ़रियाद सुन रहे जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह के पास संतोष मूरत पहुंचा तो उन्होंने तुरंत फैसला किया और सभी जरूरी अधिकारियों संग संतोष को लेकर छितौनी गांव पहुँच गए। वहां ज़मीन की नापी के बाद सम्बंधित अधिकारियों को ज़मीन संतोष के नाम करने का आदेश दिया और थानाध्यक्ष चौबेपुर को पूरी सतर्कता बरतने का निर्देश दिया।

मिलेगा न्याय
इस सम्बन्ध में जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि सन्तोष लंबे समय तक गांव से बाहर रह रहा था। उसकी जमीन उसके पटीदारों ने कब्जा कर ली थी । सन्तोष के मामले में जागरूकता बरतते हुए उसकी 4 गाँव मे जितनी ज़मीन है सभी पर कब्जा दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दिया गया है। एक गांव की जमीन पर नापी कराकर उसका कब्जा उसे तुरंत दे दिया गया है। बाकी की जमीनों के लिए भी किया जा रहा है जितनी जमीने सन्तोष के नाम है कागजी रूप से सभी उसे वापस मिलेंगी। कुछ जमीनों पर उच्च न्यायालय की रोक लगी है उसे छोड़कर बाकी जमीनी सन्तोष को मिल जाएंगी। सन्तोष के साथ साथ उसके चचेरे भाइयों की भी कुछ जमीने हड़पी गयी है उन्हें भी उनकी जमीनें वापस दी जाएंगी । अधिकारियों को इस बारे में आदेशित कर दिया गया है।

देखिये तस्वीरें