सरकार बदल गई है…

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सरकार बदल गई है’…ये वाक्य उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का तकिया कलाम बन गया है। तकिया कलाम वाले एक समर्थक मेरे घर के सामने भी रहते हैं। आधी रात को बिजली कटती है, तो अपनी बालकनी में आते हैं। मोबाइल का स्पीकर ऑन कर विद्युत उपकेन्द्र का नंबर मिलाते हैं:
बिजली क्यों गई?
जम्फर उड़ गया है।
कब तक ठीक होगा?
आधा घंटा लगेगा।
आधे घंटे में ठीक हो जाना चाहिए। सरकार बदल गई है।

बालकनी में बैठ पसीना-पसीना होते हुए, मच्छरों को पट्ट-पट्ट मारते हुए आधे घंटे इंतजार करते हैं। उनको पसीना छोड़ते हुए और पट्ट-पट्ट मच्छर मारते हुए देखता हूँ, तो सोचता हूँ- इनके पास तो इन्वर्टर भी है। पंखे की हवा लेते हुए इंतजार करने में क्या हर्ज है?
आधे घंटे इंतजार के बाद उन्होंने फोन किया। स्पीकर भी ऑन किया:
अभी तक जम्फर नहीं बदला?
आधा घंटा और लगेगा। दो ही कर्मचारी हैं। समय तो लगेगा ही।

सरकार बदल गई है। अपनी कार्यप्रणाली सुधार लो। प्रधानमंत्री 18 घंटे काम करते हैं। मुख्यमंत्री तड़के 4 बजे उठ जाते हैं और देर रात तक काम करते रहते हैं। तुम एक मामूली सा काम नहीं कर सकते। सुधर जाओ। सरकार बदल गई है।
उतनी बड़ी और वजनी सीढ़ी साइकिल से लेकर चलनी पड़ती है। समय थोड़ा आगे-पीछे तो होगा ही।
जबान लड़ाते हो। अभी तुम्हारे साहब से शिकायत करता हूँ। इतनी दूर फेकवाऊंगा कि घर आने का सपना देखोगे।
ठीक है। आपको जो करना है करिए।
कर्मचारी के सब्र का बाँध भी जवाब दे गया।

कर्मचारी की शिकायत के लिए उन्होंने साहब को फोन मिलाया। साष्टांग प्रणाम किया। मौसी और बच्चों का हाल-चाल लिया। मधुर वाणी में बिजली कटने के बारे में बताया। नमकीन वाणी में कर्मचारी की शिकायत की। उधर से जो भी आश्वासन मिला, वो सुन नहीं पाया। स्पीकर ऑन नहीं था।

एक दिन कर्मचारी घर के सामने वाले खम्भे पर खट-खुट कर रहा था। मैंने उससे पूछा- अमुक का बिजली विभाग में बड़ा रुतबा है। खम्भे से उतरते हुए कर्मचारी ने बताया- होगा क्यों नहीं; टेंडर के लिए साहब का पैर दबाते-दबाते दूर की रिश्तेदारी खोज निकाली है। साहब अब इनके मौसा हो गए हैं।

कर्मचारी से पहली बार सरकार बदल गई है कहने और आखिरी बार सरकार बदल गई है कहने की उनकी ‘लाउडनेस’ में अंतर होता है। पहली बार कहते हैं तो लगता है शायद बादल गरज रहे हों। अंतिम बार कहते हैं तो बादलों का गरजना सुनिश्चित हो जाता है। उनका बालकनी में आकर कर्मचारियों से गरजकर बात करना अकारण नहीं है। कॉलोनी में अभी तक सभी लोग नहीं जान पाए हैं कि सरकार बदल गई है। ‘परफॉरमेंस’ वाली सरकार आ गई है।

सरकार बदलने की सूचना पार्टियाँ अपने-अपने तरीके से देती आई हैं। सरकारी अस्पतालों में जाने वाले मरीज और उनके तीमारदार नहीं जानते कि सरकार बदल गई है। तो सरकार अस्पताल की इमारत को नीले रंग से रंगवा देती है। सरकारी अस्पताल जाने वाले समझ जाते हैं कि बसपा की सरकार आ गई है।

रोडवेज बस से यात्रा करने वाले यात्री नहीं जानते कि सरकार बदल गई है। तो सरकार रोडवेज बसों को हरे और लाल रंग में रंगवा देती है। यात्री समझ जाते हैं कि सपा की सरकार आ गई है। सरकारी कर्मचारी और अधिकारी नहीं जानते कि सरकार बदल गई है। तो सरकार उनकी कुर्सी पर भगवा तौलिया रखवा देती है। कर्मचारी और अधिकारी समझ जाते हैं कि भाजपा की सरकार आ गई है।

मतदाता बनने के बाद उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का मुख्यमंत्री नहीं देखा। कांग्रेसजन अतीत को याद कर लें, कांग्रेस सरकार बदलने की सूचना कैसे देती थी।

एक दिन चाय की दुकान पर वे मिले। अपनी तकिया कलाम मंडली के साथ कानून-व्यवस्था का महिमामंडन कर रहे थे। उनकी बातें सुन मैं सोच रहा था- एनकाउंटर में ठोंक अपराध रोकने की मुख्यमंत्री की नीति के बाद भी अपराध का ग्राफ ऊपर चढ़ता जा रहा है। पुलिस पर प्रमोशन के लिए फेक एनकाउंटर और बेगुनाहों को मारने का आरोप लग रहा है। पुलिस का अपराधीकरण बढ़ रहा है। ये कौन सी कानून-व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बता रहे हैं?

बातचीत के दौरान जैसे ही उन्होंने ‘सरकार बदल गई है’ कहा, मैंने पूछा- पार्टी बदलती है, मुख्यमंत्री बदलते हैं; पर सरकार अपना चरित्र बदलने में बड़ी आनाकानी करती है।

इसका कारण ये है कि जनता सहयोग नहीं करती। जनता सहयोग करे तो सब कुछ बदला जा सकता है।
कानून व्यवस्था भी सुधारी जा सकती है?
बिल्कुल। किसी के घर में हथियारबंद डकैत घुसें तो घरवालों को डकैतों से कहना चाहिए- सुधर जाओ। सरकार बदल गई है। ये सुनते ही डकैत हथियार फेक भाग जाएंगे। किसी से रंगदारी माँगी जाय, तो रंगदारी माँगने वाले से कहना चाहिए- सुधर जाओ। सरकार बदल गई है। ये सुनते ही रंगदारी माँगने वाला अदालत में आत्मसमर्पण कर देगा। हत्या की नीयत से अपराधी गोली चलाने वाला हो, तो उससे कहना चाहिए- सुधर जाओ। सरकार बदल गई है। ये सुनते ही अपराधी सीधे जेल जायेगा। चौदह साल कैद-ए-बामुशक्कत के बाद ही बाहर आएगा।
सरकार बदल गई है कहने से बलात्कारियों का भी ह्रदय परिवर्तन हो जाएगा?
-बिल्कुल।
मैंने उनसे वादा किया कि अपराधियों को औकात में रखने वाले आपके फार्मूले से मैं जनता को जरूर परिचित कराऊंगा। वे खुश हुए। उन्होंने चाय वाले से कहा- भाई की चाय का पैसा मेरे खाते में लिख लिया करो।


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