मुस्लिम बहनों ने अपने इस भाई को बांधी श्रीराम लिखी राखी, 25 वर्षों से निभा रहीं रिश्ता

वाराणसी। भाई-बहन के रिश्तों का यह बंधन प्रेम, विश्वास और सद्भावना का है। धर्म-जाति से ऊपर रक्षाबंधन के त्यौहार को सबसे पवित्र माना जाता है। विशाल भारत संस्थान एवं मुस्लिम महिला फाउण्डेशन के संयुक्त तत्वावधान में सुभाष भवन, इन्द्रेश नगर, लमही में रक्षाउत्सव आयोजित किया गया। श्रीराम जन्मभूमि पूजन को देखते हुए मुस्लिम बहनों ने अपने हाथ से श्रीराम राखी बनाई और अपने भाई डॉक्टर राजिव श्रीवास्तव को बाँधी। मुस्लिम महिलाएं यह कार्य अनवरत 25 वर्षों से करती चली आ रही हैं।

रक्षाबंधन त्यौहार के बहाने कच्चे धागे से रिश्तों को जोड़ने का गवाह बना लमही का सुभाष भवन, जहां मुस्लिम बहनें अपने भाई विशाल भारत संस्थान के अध्यक्ष डा राजीव श्रीवास्तव को राखी बांधने पहुंची। 25 वर्षों से अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने वाली शहीदुन्निसा ने कभी जाति धर्म के भेद को नहीं माना। हर साल अपने भाई को पूरे विधि विधान से राखी बांधती हैं।

शहीदुन्निसा तिलक लगाकर डॉ राजीव श्रीवास्तव की आरती करती हैं और अपने भाई का मुंह मीठा कराती हैं। भाई बहन का यह रिश्ता दुनिया के लिये एकता की मिसाल है, लेकिन इन भाई बहनों के लिये एक दूसरे के सुख दुख में शामिल होने और रोजमर्रा की जिन्दगी जीना का तरीका। शहीदुन्निसा ने इस बार अपने भाई की खुशी के लिये श्रीराम राखी बांधी और अल्लाह से दुआ किया कि पूरे हिन्दुस्तान के लोग एक दूसरे से रिश्तों में बंध जायें और हमेशा के लिये नफरत खत्म हो जाये।

इस अवसर पर डा राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि रक्षाबंधन रिश्तों की श्रृंखला तैयार करता है, धर्मों के बीच सेतु का काम करता है और नफरत को खत्म करने की गारंटी देता है। राखी बांधने मात्र से ही भावना पवित्र हो जाती है और महिला बहन के रूप में स्वीकार्य बन जाती है। उस महिला का पूरा परिवार रिश्तों के बंधन में बंध जाता है, जहां धर्म और जाति का भेद स्वतः समाप्त हो जाता है। राखी दिलों को जोड़ने वाला है और रिश्तेदारी बढ़ाने वाला है। पूरी दुनियां में भेद को खत्म करके समानता लाने के लिये भारतीय संस्कृति के महान त्यौहार रक्षाबंधन को बढ़ावा देना चाहिए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इन्द्रेश कुमार को हिन्दू-मुस्लिम बहनों ने वर्चुअल राखी बांधी। इस अवसर इन्द्रेश कुमार ने कहा कि भगवान श्रीराम का मंदिर निर्माण भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। यह रहने वाले सभी मुस्लिम भारतीय हैं, इनके पूर्वज भगवान श्रीराम हैं, ये अरबी संस्कृति को नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति को मानने वाले हैं, इसलिये रक्षाबंधन मनाते हैं।

इस कार्यक्रम में डा शालिनी शाह, नजमा परवीन, नगीना बेगम, नाजमा बानो, अर्चना भारतवंशी, डा मृदुला जायसवाल, पूनम श्रीवास्तव, सुनीता श्रीवास्तव, सरोज देवी, गीता देवी, अर्चना श्रीवास्तव, मैना देवी, रमता, प्रियंका आदि ने भाग लिया।