गलवान घाटी में तैनात वीर सपूतों को भेजी गयी बनारस की महिला शिल्पियों द्वारा बनायीं गयी स्पेशल राखी

वाराणसी। गलवान घाटी में चीनी सेना से दो दो हाथ करने के लिए मुस्तैद सेना के जवानों के प्रति प्रेम और आदर का भाव प्रकट करते हुए बनारस की शिल्पकार महिलाओं ने हस्तनिर्मित लकड़ी की आकृतियों से सुसज्जित राखी भेजी है। जीआई क्राफ्ट वुडेन लेकरवेयर एंड टॉयज से बनी ये राखी मंगलवार को वाराणसी संसदीय कार्यालय में महिला शिल्पियों ने प्रधानमंत्री को लिखे एक आग्रह पत्र के सतह भेजते हुए इन राखियो को उनको स्वीकार करने और गालवान घाटी में तैनात भारत माता के वीर सपूतों को भेजने का आग्रह किया है।

इस सम्बन्ध में पद्मश्री जीआई विशेषज्ञ डा रजनी कांत ने बताया कि कोविड 19 के संक्रमण में आत्म निर्भर भारत के घोषणा के पश्चात ही इसकी पृष्ठभूमि बनानी शुरू कर दी गई थी। बनारस की हुनरमन्द महिला शिल्पियों ने 15 दिन पहले इस जीआई क्राफ्ट वुडेन लेकरवेयर एंड टॉयज से तैयार राखी की पहली खेप नेशनल मेरिट अवॉर्डी रामेश्वर सिंह के द्वारा व्यापार हेतु नई दिल्ली भेज दिया गया था और तत्काल डिमांड आने के अपना और तेजी से तैयार किया गया।

इसके बाद मंगलवार को वाराणसी संसदीय कार्यालय में महिला शिल्पियों ने प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय में प्रधानमंत्री के नाम एक आग्रह पत्र के साथ इन राखियो को उनको स्वीकार करने और गलवान घाटी में तैनात भारत माता के वीर सपूतों को भेजने का आग्रह किया है।

डॉ रजनीकांत ने बताया कि प्रधानमंत्री को संबोधित राखी का पैकेट वाराणसी संसदीय कार्यालय में महिला शिल्पियों शालिनी, वंदना, रीता, पुष्पा, सीता,के साथ वीरेंद्र, राजकुमार और रामेश्वर सिंह ने कार्यालय प्रभारी शिवशरण पाठक को सौंपा और आग्रह किया की इसे प्रधानमंत्री और देश के पहले सीडीएस विपिन रावत जी के माध्यम से वीर जवानों तक गलवांन घाटी भेज दिया जाये।

ये है महिलाओं के पत्र की इबारत

आप के आशीर्वाद और प्रेरणा से हम काशी की शिल्पकार बहन , बेटियां आत्म निर्भर भारत के तहत मंत्र ले कर काशी के जी आई पंजीकृत क्राफ्ट ” वुडेन लेकरवेयर एंड टॉयज” के अन्तर्गत पहली बार राखी बनाने का निर्णय लिया जिसमे रामेश्वर सिंह, नेशनल मेरिट अवॉर्डी ने पूरा सहयोग किया है। हम लोग इस जीआई पंजीकृत राखी को, रक्षा बंधन के पवित्र अवसर पर देश की रक्षा के लिए तैनात गलवान घाटी के वीर जवानों को और आप के लिए यह राखी भेज रहे है ।

 

आप से आग्रह है कि काशी की शिल्पकार बहनों की राखी भारत माता के वीर सपूतों तक पहुंचवाने की कृपा करे और स्वयं भी रक्षा बंधन के दिन अपनी कलाई पर सुशोभित कर के काशी के बहनो के साथ देश की बौद्धिक संपदा में शुमार काशी के क्राफ्ट का मान बढ़ाए ।

आप के प्रेरणा से लोकल को ग्लोबल बनाते हुए करोना के संक्रमण काल में भी वाराणसी के इस जी आई क्राफ्ट की लगभग पचास हजार पीस लकड़ी की हस्त निर्मित राखी को सप्लाई किया गया है जिससे बहुत से महिला शिल्पियों को रोजगार मिला।