गंगा किनारे धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक अनुष्ठान पर देना होगा टैक्स, शुरू हुआ वि‍रोध

0
27

वाराणसी। धर्म की नगरी काशी में अब घाटों पर पूजा, अनुष्ठान और गंगा आरती करवाने या करने का शुल्क नगर निगम को देना होगा। नगर निगम वाराणसी ने नदी किनारे रख रखाव संरक्षण एवं नियंत्रण उपविधि 2020 की घोषणा कर दी है। बुधवार से यह नई व्यवस्था लागू भी हो गयी है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद घाट पुरोहितों ने इसे गलत बताया है।

वाराणसी के गंगा तट पर सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक अनुष्ठानों के लिए नगर निगम ने 1 से 15 दिवस का शुल्क निर्धारित किया है। इस नयी व्यवस्था के हिसाब से कोई भी बिना अनुमति और बिना शुल्क के आयोजन नहीं करवा पायेगा।

देना होगा इतना शुल्क
इस सम्बन्ध में अपर नगर आयुक्त देवी दयाल ने बताया कि घाटों की साफ सफाई और उनके संरक्षण के लिए शुल्क की व्यवस्था की गई है। घाटों पर पूजा पाठ कराने वाले पुरोहित, गंगा आरती के आयोजकों और अन्य धार्मिक आयोजनों के लिए अब शुल्क निर्धारित किया गया है। नगर निगम नदी के रखरखाव संरक्षण एवं नियंत्रण उपविधि 2020 के मुताबिक ये नये नि‍यम बनाये गये हैं।

घाट के हित में लिया गया है फैसला
जब अपर नगर आयुक्त से यह पूछा गया कि कहा जा रहा है कि जिस उपबंध का हवाला दिया जा रहा है उसमे घाट समाहित नहीं है। इसपर अपर नगर आयुक्त ने साफ कहा कि घाट भी उस उपबंध में समाहित हैं और ये घाट के हित में लिया गया फैसला है।

हमें पैसा नहीं भिक्षा मिलती है
इस फैसले के बाद तीर्थ पुरोहितों में आक्रोश है। तीर्थ पुरोहित जयप्रकाश मिश्रा ने बताया कि गंगा तट बैठे पंडा की कमाई को देखते हुए यह फैसला गलत है। हम कभी 1 हज़ार रुपये दिन में कमाते हैं तो किसी दिन हमें 100 रुपया भी नहीं मिलता है। कभी तो पैसा भी नहीं मिलता। तीर्थ पुरोहित जयप्रकाश ने बताया कि यह रोज़गार नहीं है, भिक्षा है। आज कल कोई भिक्षा भी नहीं देता। नगर निगम का यह फैसला गलत है क्योंकि ब्राह्मण कहाँ से देगा, जब उसे भिक्षा मिलेगी तो वह घर का खर्च चलाएगा कि टैक्स भरेगा। जयप्रकाश ने बताया कि इस फैसले के बाद कई ब्राह्मण घाट छोड़ देंगे।

देखें वीडियो