कोरोना में फीकी पड़ गयी बनारसी साड़ी की चमक, हुनर वाले हांथ लगा रहे हैं पान, उठा रहे गारा

वाराणसी। हुनर के शहर बनारस के हुनरमंद कोरोना काल में टूट से गए हैं। बनारसी साड़ियों के लिए जाना जाने वाला शहर बनारस इस दौरान शांत शांत सा दिखा। इस शान्ति में शहर बनारस की ख़ास पहचान बनारसी साड़ी की चमक भी फीकी पड़ गयी है। इस कारोबार में लगे बिज़नेसमैन से लेकर रोज़ाना की दिहाड़ी पर लूम चलाने वाले सब परेशान हैं।

साड़ियों को अपने हांथ के हुनर से परवान चढाने वाले हुनरबाज़ अब पान की दुकान खोलकर बैठे हैं, तो कहीं मज़दूरी कर गारा मिट्टी उठा रहे हैं। घरों के हालात खराब हैं। दुबारा कब हालात सुधरेंगे इसे कहा नहीं जा सकता।

शहर की बुनकर बस्ती में जब Live VNS पहुंचा तो यहाँ बुनकरों का लूम बंद दिखाई दिया। बुनकर पान और चाय की दुकान खोलकर बैठे दिखाई दिए। हमने छोटा सा जनरल स्टोर खोलकर बैठे बुनकर महमूद अख्तर से बात कि तो उन्होंने बताया कि वो मशीन (लूम) चलाते थे, लॉकडाउन ने सब ख़त्म सा कर दिया है, जिस जगह एक साथ दस लूम चलते थे वहां अब सिर्फ दो लूम चल रहे हैं बाकी बंद हैं। ऐसे में हमें घर का खर्च चलाने के लिए दुकान खोलनी पड़ी।

महमूद अख्तर की दुकान के बगल में ही सलीम जो की बुनकारी करते थे पान लगाते मिले। सलीम ने कहा कि कोरोना की वजह से पहले चाइनीज़ रेशम आना बंद हुआ उसके बाद धीरे धीरे लूम बंद होते गए। हमारा भी एक कारखाना था वो भी बंद हो गया। अब हिन्दुस्तान के शहरों से भी डिमांड नहीं हो रही है ऐसे में बनारसी साड़ी की चमक फीकी पड़ रही है।

साड़ी का बिजनेस देश और विदेशों तक करने वाले साड़ी की गद्दी चलाने वाले हश्मतुल्लाह ने दुखी मन से कहा कि किससे शिकायत करें। पब्लिक अपना पेट काटकर एक वक्त का खाना खाये और ये सांसद, विधायक और मंत्री पूरा खाएं। हमारी मांग है कि इस समय कोरोना काल में सभी सांसद, विधायक और मंत्रियों की जो सैलेरी यही उसमे से 75 प्रतिशत कटौती कर ग़रीबों की सुविधा में लगा दिया जाए।

उन्होंने बताया कि पूरी दुनिया में जो बनारसी साड़ी प्रसिद्द थी उसका काम आज पूरी तरह से बंद है। हश्मतुल्लाह ने बताया कि बुनकारी का हुनर रखने वाले अब चाय और पान बेच रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के बाद बनारसी साड़ी उद्योग कुटीर उद्योग है पर हमें कोई सुविधा नहीं है। इस साड़ी को बनाने में घर का 5 साल का लड़का भी लगता है और घर की 80 साल की बुजुर्ग भी।

शहर बनारस में बुनकरों की तादात काफी ज़्यादा है पर आज कल इन बस्तियों में करघे की खातर पटर बंद है क्योंकि साड़ी का ऑर्डर नहीं है। यदि जल्द ही इसका कोई समाधान नहीं निकला गया तो यह व्यवसाय अन्य हस्तशिल्प की तरह दम तोड़ेगा।

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